*हिंदू समाज की वास्तविक शक्ति उसकी एकता में निहित है:- विनय दीक्षित*

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*हिंदू समाज की वास्तविक शक्ति उसकी एकता में निहित है:- विनय दीक्षित*

 

विराट हिंदू सम्मेलन’ का आयोजन हुआ। इसमें सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के बारे में जानकारी दी गई।

 

 

बरोठा , संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर पूरे भारतवर्ष में हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है बरोठा खण्ड में बरोठा मंडल, टिगरिया मंडल, जामगोद मंडल तीन मंडल में हिंदू सम्मेलन का आयोजन हुआ जिसमें 30 गांवों के लोग सहभागी हुए। बरोठा नगर में कलश यात्रा निकाली गई जिसमें भारत माता , झांसी की रानी व वीर शिवाजी की मानव निर्मित स्वांग रचित झांकी एम्स पब्लिक स्कूल द्वारा निकाली गई, जो आकर्षण का केंद्र रही कलश यात्रा पूरे नगर भ्रमण के पश्चात धाकड़ धर्मशाला पहुंची जहां विराट हिंदू सम्मेलन एवं सहभोज का आयोजन किया गया । कार्यक्रम की शुरुआत में अतिथियों द्वारा भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम शुरू किया गया । तत्पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति रुद्राक्ष एकेडमी बरोठा द्वारा ऑपरेशन सिंदूर पर लघु नाटिका, कन्या हाई स्कूल नाट्य मंचन किया। बालिकाओं द्वारा जैविक कृषि पर लघु नाटिका व नशा मुक्ति पर लघु नाटिका की सुंदर प्रस्तुतियां दी गई । मुख्य वक्ता के रूप में विनय दीक्षित प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय सह संयोजक का कहना था कि पूरा देश सभी का है और यही भावना सच्ची सामाजिक समरसता की पहचान है. उन्होंने कहा कि सामाजिक एकता की पहली शर्त मन से भेदभाव की भावना को खत्म करना और हर व्यक्ति को अपना समझना है. संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर पूरे भारतवर्ष में हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा कहा जाता है कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करना चाहिए लेकिन भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की आवश्यकता नहीं है, भारत सनातन आदिकाल से हिंदू राष्ट्र है जिसे हिंदू राष्ट्र घोषित करने की आवश्यकता नहीं है, भारत हिंदू राष्ट्र था, है और हमेशा रहेगा ।

आज हम सब एक ऐतिहासिक क्षण के साक्षी हैं। संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होना केवल एक संस्था की वर्षगांठ नहीं है, बल्कि यह सनातन हिंदू समाज के पुनर्जागरण की एक शताब्दी है। 100 वर्ष पहले, हिंदू समाज बिखरा हुआ था, कमजोर था, और स्वयं को हिंदू कहने में संकोच करता था। लेकिन आज, हम एक आत्मविश्वास से भरे हुए, एकजुट हिंदू समाज के रूप में यहाँ खड़े हैं।

एकता ही शक्ति (हम एक हों)

शताब्दी वर्ष का मुख्य संदेश है – “हिंदू समाज की वास्तविक शक्ति उसकी एकता में निहित है”। हमें जाति, वर्ग और पंथ के संकीर्ण भेदभावों से ऊपर उठकर एक जाग्रत समाज बनना होगा। हमारे भीतर की टूट ही हमारी सबसे बड़ी दुश्मन है। हमें यह याद रखना होगा कि जब-जब हिंदू समाज बिखरा है, तब-तब राष्ट्र को क्षति पहुंची है।

सामाजिक समरसता और संस्कार

सच्चा हिंदू वही है जो समाज के अंतिम व्यक्ति के साथ समरसता का व्यवहार करे। आज के इस पावन अवसर पर, हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने परिवार और समाज में सामाजिक समरसता का भाव बढ़ाएंगे। साथ ही, हमें अपनी युवा पीढ़ी को संस्कारित करना होगा, उन्हें हिंदू धर्म के महान आदर्शों से परिचित कराना होगा ताकि वे राष्ट्र की प्रगति में भागीदार बनें।

राष्ट्रवाद और राष्ट्र रक्षा

हमारा राष्ट्रवाद, मानवता की सेवा पर आधारित है। भारत को ‘विश्व गुरु’ के रूप में पुनः प्रतिष्ठित करने के लिए हिंदू समाज को निर्दोष, गुणवान और संगठित होना होगा। देश के सामने आने वाली किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए हिंदू समाज को सदैव तत्पर रहना होगा। अंत में ज्ञानु नागर ने कार्यक्रम में पधारे समस्त हिंदू समाज व अतिथियों का आभार व्यक्त किया ।

जामगोद मंडल के हिन्दू सम्मलेन में मुख्य वक्ता अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की अखिल भारतीय कार्यकरणी विशेष आमंत्रित सदस्य योगेश रघुवंशी रहे। आपने सभा को सम्बोधित करते हुए कहा की इस शताब्दी वर्ष में, चलिए हम यह प्रतिज्ञा करें कि हम अपने सनातन धर्म की रक्षा करेंगे, अपनी मातृभूमि के प्रति समर्पित रहेंगे और देश को एक समर्थ व अखंड भारत के रूप में आगे बढ़ाएंगे।

 

टिगरिया मंडल के हिंदू सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला सह धर्म जागरण प्रमुख अर्जुन पटेल रहे। पटेल ने सभा को संबोधित करते हुए कहा की संघ हिन्दू समाज की एकता के लिए प्रतिबद्ध है।

 

सभी हिन्दू सम्मलेनों में सन्तो का आशीर्वचन भी प्राप्त हुआ, एवं

मातृशक्तियों ने पांच परिवर्तन से समाज परिवर्तन के विषयों को रखा।

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